CGPSC 2003 भर्ती घोटाला फिर गरमाया: 23 साल बाद खुली पुरानी फाइल, 147 अफसर…कई को IAS अवॉर्ड, अब फिर उठे सवाल…EOW की जांच तेज
उत्तर पुस्तिकाओं में गड़बड़ी और नंबर बढ़ाने के आरोप, EOW की जांच तेज; पुराने चयन की दोबारा पड़ताल से प्रशासनिक गलियारों में हलचल

रायपुर, 9 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC की वर्ष 2003 की भर्ती परीक्षा से जुड़ा करीब 23 साल पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। जोगी शासनकाल में हुई इस भर्ती प्रक्रिया में डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर चयन हुआ था। लंबे समय से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, अंकों की स्केलिंग और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की जांच आगे बढ़ने की खबर से इस पुराने मामले की फाइल फिर खुल गई है।
CGPSC की 2003 की भर्ती को लेकर विवाद परीक्षा परिणाम आने के बाद ही शुरू हो गया था। अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन और अंकों में कथित विसंगतियों को लेकर सवाल उठाए। बाद में मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड और हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, वैकल्पिक विषयों की स्केलिंग और मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
इस मामले में अब EOW की जांच फिर चर्चा में है। रिपोर्टों के अनुसार, 15 से ज्यादा प्रशासनिक अधिकारी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं और जांच एजेंसी मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। हालांकि, किसी भी अधिकारी की अंतिम कानूनी जिम्मेदारी जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
एक पेज के जवाब पर 55 अंक का दावा
2003 की इस भर्ती में सबसे ज्यादा चर्चा जिस कथित गड़बड़ी की हुई, वह उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन से जुड़ी है। मामले से संबंधित दस्तावेजों और रिपोर्टों में दावा किया गया कि एक अभ्यर्थी ने कथित तौर पर केवल एक पेज लिखा, लेकिन उसे 60 में से 55 अंक दे दिए गए। दूसरी ओर, कुछ अभ्यर्थियों ने पूरी उत्तर पुस्तिका लिखने के बावजूद कथित तौर पर 10 से 15 अंक ही हासिल किए।
अंकों में इस कथित असामान्य अंतर ने मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए। हालांकि, ऐसे दावों को जांच और न्यायिक निष्कर्ष के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
RTI से सामने आई जानकारी, फिर हाईकोर्ट पहुंचा मामला
मामले में वर्ष 2005 के बाद विवाद ने तेजी पकड़ी। अभ्यर्थियों की ओर से RTI के माध्यम से परीक्षा और मूल्यांकन से संबंधित जानकारी हासिल की गई। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देते हुए मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से मूल्यांकन, स्केलिंग और चयन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए गए। मामला वर्षों तक अदालत में चलता रहा और अंततः हाईकोर्ट के फैसले तक पहुंचा।
हाईकोर्ट ने री-स्केलिंग और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के दिए थे निर्देश
2016 में बिलासपुर हाईकोर्ट ने 2003 PSC मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषयों की दोबारा स्केलिंग और एंथ्रोपोलॉजी विषय की उत्तर पुस्तिकाओं की पुनः जांच के निर्देश दिए थे। इसके साथ संशोधित मेरिट सूची तैयार करने की बात भी सामने आई।
बाद के न्यायिक घटनाक्रम में इस भर्ती से जुड़े 147 चयनित अधिकारियों की नियुक्तियों को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा हुआ। यही वजह है कि 2003 की यह भर्ती छत्तीसगढ़ के सबसे लंबे समय तक चलने वाले भर्ती विवादों में गिनी जाती है।
147 अफसरों के चयन पर मंडराया था संकट
इस मामले का असर सिर्फ परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रहा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 2003 बैच में चयनित 147 अधिकारियों की नियुक्तियों और उनके भविष्य को लेकर स्थिति गंभीर हो गई थी। इनमें प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ पुलिस सेवा से जुड़े अधिकारी भी शामिल थे। मामला आगे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है। इसी कारण 2003 बैच के अधिकारियों की स्थिति पर अंतिम तस्वीर लंबे समय तक साफ नहीं हो सकी।
अब EOW की जांच से बढ़ी हलचल
करीब दो दशक से अधिक समय बाद EOW की जांच दोबारा चर्चा में आने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, दिए गए अंकों, स्केलिंग प्रक्रिया और चयन से जुड़े पहलुओं को देखा जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 23 साल पुराने इस मामले में जांच एजेंसी जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ पाएगी? अगर जांच में पुराने आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो यह मामला एक बार फिर छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया पर बड़ी बहस छेड़ सकता है।
एक ही आयोग, दो बड़े भर्ती विवाद—2003 और 2021 को समझना जरूरी
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 2003 का विवाद अलग मामला है, जबकि हाल के वर्षों में चर्चित CGPSC-2021 भर्ती घोटाला अलग प्रकरण है।
CGPSC-2021 भर्ती में 171 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। प्रारंभिक परीक्षा 13 फरवरी 2022 को हुई, जिसमें 2,565 अभ्यर्थी सफल हुए। इसके बाद 26 से 29 मई 2022 के बीच मुख्य परीक्षा हुई, जिसमें 509 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए पहुंचे। इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी हुई।
इस भर्ती में कथित भाई-भतीजावाद, प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोपों की अलग जांच हुई। CBI ने बाद में इस मामले में तत्कालीन CGPSC सचिव जीवन किशोर ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक समेत कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की।
जनवरी 2026 में सामने आई CBI की चार्जशीट संबंधी रिपोर्टों में 29 आरोपियों का उल्लेख किया गया था और जांच में कथित प्रश्नपत्र लीक, चयन में हेरफेर तथा प्रभावशाली उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के आरोपों का विवरण सामने आया।
2021 केस में ED की कार्रवाई से भी बढ़ा दबाव
हालिया घटनाक्रम में CGPSC भर्ती मामले की जांच में ED की कार्रवाई ने भी इसे फिर चर्चा में ला दिया है। सितंबर 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक, ED ने CGPSC मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया और एजेंसी ने कथित तौर पर करीब 3 करोड़ रुपये के कैश ट्रेल से जुड़े पहलुओं की जांच की बात कही है। वहीं, 1 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने CGPSC मामले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक को जमानत दी थी।
अब 2003 की फाइल ने फिर बढ़ाई सियासी और प्रशासनिक हलचल
एक तरफ CGPSC-2021 मामले में CBI और ED की जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ 2003 की पुरानी भर्ती में EOW की सक्रियता ने CGPSC की भर्ती प्रक्रिया को लेकर पुराने सवाल फिर जिंदा कर दिए हैं।
23 साल पुराने मामले में अब जांच किस दिशा में जाती है, किन अधिकारियों की भूमिका सामने आती है और क्या आरोपों के आधार पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई होती है—इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं।
